Short Inspirational Story in Hindi For Student

मोटिवेशन जिंदगी का एक अहम हिस्सा है। जिसके बिना हम कोई भी काम मन से पूरा नहीं कर पाते। हम जिंदगी में कभी जीतते हैं कभी हारते हैं। इस हार-जीत की तालमेल को बनाए रखने के लिए एक चीज की हमें बहुत जरूरत पड़ती है। और वह है प्रेरणा। जब हम हारते हैं तो किसी विद्वान व्यक्ति से प्रेरणा लेकर। फिर अपने काम में मन से लग जाते हैं। तो इसी प्रकार जिंदगी में जब हम कमजोर महसूस करते हैं तो मोटिवेशन हमारे लिए दवा का काम करता है। तो ऐसे ही पढ़िए कुछ Short Inspirational Story in Hindi

Short Inspirational Story in Hindi For Student Focus

एक बार स्वामी विवेकानंद भ्रमण पर गए हुए थे। वहां उसने देखा। कि कुछ लड़के पुल पर खड़े होकर नदी में तैर रहे अंडों के छिलकों पर निशाना लगा रहे हैं। और वह हर निशाना चूक रहे हैं। तो स्वामी विवेकानंद वहां गए और उन्होंने भी निशाना लगाया। उनका पहला निशाना ही बिलकुल सटीक लगा।और उन्होंने एक-एक कर के 12 निशाने लगाए। जो बिल्कुल सटीक थे। लड़के य देखकर भौं चक्का रह गए। और उन्होंने स्वामी विवेकानंद से पूछा।

कि आपने ऐ सब कैसे किया,कैसे हो सकता है ये। स्वामी विवेकानंद ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। कि कि कर तो तुम भी सकते हो। पर तुम्हारा पूरा ध्यान अंडों के छिलकों पर  नहीं था। इसलिए तुम हर निशाना चूक रहे थे। पर जब  मैंने निशाना लगाया। तो मेरे दिमाक में अंडों के छिलकों पर निशाना लगाने के सिवाये मुझे कुछ नही सुझ रहा था। सिर्फ मुझे अंडे के छीलके दिख रहे थे। इसी कारण मैं अपना हर निशाना सटीक लगा सका।  तो अगर तुम्हें भी कोई काम मैं सफलता चाहिए। तो उससे पूरे फोकस के साथ करो। सफलता निश्चित तुम्हारी होगी।

Short Inspirational Story Of a lazy Boy In Hindi

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एक बार की बात है। एक गांव में एक किसान रहता था। जो बहुत मेहनती था और सारा दिन बहुत मेहनत करके अपना घर का गुजारा करता था। उसका एक बेटा भी था। जो बहुत आलसी और कामचोर था और व्यर्थ के कामों में पैसे उड़ाता रहता था।उसकी इन्हीं हरकतों के कारण किसान बहुत दुखी हो गया।  उसने अपने बेटे को बुलाया। और कहा,

कि बेटा अब तुम बड़े हो गए हो। अब तुम्हें कुछ काम करना पड़ेगा, पैसे कमाने पड़ेंगे। अगर तुम ऐसा नहीं कर सके तो मैं तुम्हें घर में घुसने नहीं दूंगा। पिता की बातें सुनकर बेटा अपनी मां के पास चला गया। और उसने यह सब बातें अपनी मां को बता दी। मां ने अपने बेटे को दुखी देखकर उसे कुछ पैसे दे दिए। शाम को जब पिता घर आया तो बेटे ने वह पैसे अपने पिता को दे दिए। पिता ने कहां, की यह पैसे बाहर कुएं में फेंक आओ।

बेटे ने  ऐसा ही किया अगले दिन फिर वह अपनी बहन के पास गया और सब बातें बताई और बहन ने भी तरस खाकर कुछ पैसे दे दिए। तो फिर वह पैसे लेकर शाम को पिता के पास पहुंचा। और बोला कि यह मेरी आज की कमाई है। पिता ने कहा जाओ और इन पैसों को बाहर कुएं में फेंक दो। उसने फिर ऐसा ही किया। अगले दिन जब उसे कहीं पर पैसे नहीं मिले। तो उसे मजबूरी में काम करना पड़ा। और वह बाजार में एक दुकान पर काम करने लगा। वहां से उसने कुछ पैसे कमाए और शाम को अपने पिता को दे दिए।

पिता ने फिर कहा की बेटा जाओ इन पैसों को बहार कुएं में फेंक दो।  बेटे को पिता की बात सुनकर बहुत गुस्सा आया। और उसने  गुस्से में कहा, कि ऐसे कैसे आप किसी की मेहनत की  कमाई को  खराब कर सकते हैं  पिता ने  कहा, कि बेटा  यही सवाल तुम अपने आप से पूछ कर देखो। बेटा पिता की बातों से सब समझ गया। और पिता के  पैरों में गिरकर माफी मांगने लगा। पिता ने उसे उठाया और  और गले लगाते हुए कहा। की किसी की मेहनत की  कमाई खराब करने से पहले खुद कमा कर देखो।

Short Inspirational Story Of Two Friends In Hindi

Short Inspirational Story in Hindi

एक बार की बात है दो दोस्त थे उनमें से एक शरीफ और  सीधा-साधा नेक और हर काम को अच्छी तरह से करने वाला था। वही दूसरा थोड़ा शरारती और नटखट था। उसे अपने दोस्त के हर काम को बिगाड़ने में बड़ा मजा आता था। उसका दोस्त हर रोज सुबह मंदिर में जाता। और भगवान की मूर्तियों को साफ करता। फूलों से उनको सजाता ,पूजा करता उसके जाने के बाद बाद उसका वो दोस्त सारा मंदिर सूखे पत्तों से गंदा कर देता। और भगवान पर चढ़ाया हुआ चढ़ावा खा लेता। ऐसे ही कुछ दिन चलता रहा। एक दिन बड़े जोर की बारिश हुई। शरीफ दोस्त ने सोचा।

कि आज इतनी बारिश में कहां बारिश में कहां जाओगे। कल चले जाना। वहीं उसका दोस्त तेज बारिश होते हुए भी मंदिर में पहुंचा। और मंदिर को गंदा कर के के कर के के आ गया। भगवान शरारती बच्चे से बड़े खुश होकर प्रकट हुए। और बोले बोलो बेटा आपको क्या चाहिए। शरारती बच्चा सहम गया। और डरते डरते कहा, कि हे प्रभु मैं तो आपके मंदिर को हर रोज गंदा करके गंदा करके आता हूं। तो आप मुझ पर इतनी दया क्यों दिखा रहे हैं। भगवान ने मुस्कुराते हुए कहा कि बेटा तुमने इतनी बारिश होते हुए भी बिना कोई परवाह किए। आज भी मेरे पास आए।

और तुमने अपना काम किया। मैं तुम्हारी इसी बात से बहुत प्रसन्न हूं। तो दोस्तों हर काम की शुरुआत हम बड़े अच्छे से करते हैं। पर आने वाली रास्ते में बाधाओं को देख कर रुक जाते रुक जाते हैं। काम को छोड़ देते हैं। और हम असफल हो जाते हैं। भगवान हमसे यह नहीं कहता। कि हर रोज मंदिर आओ आओ और मेरी पूजा करो। भगवान हमसे यह इच्छा करता है। कि अपने काम को लग्न और मन  से हर रोज करो। क्योंकि काम ही मनुष्य का पहला कर्म है। धन्यवाद कहानी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। और हर रोज नई नई कहानियां पढ़ने कहानियां पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट Hindijosh.com को फॉलो करें। धन्यवाद आपका दिन शुभ रहे। 

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