दिल्ली के 10 सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल -Tourist Place In Delhi in Hindi

Tourist Place In Delhi in Hindi – भारत देश की राजधानी दिल्ली देश के मद्य्य में स्तिथ है, जो की देश की राजनीतिक का मुख्य केंद्र है देश में होने वाली हर रोज राजनेतिक उथल-पुथल के कारण चर्चा का विषय बना रहता।

पर दिल्ली केवल राजनीति के कारण ही प्रशिद्ध नही है। यह अपनी खूबसूरती से भी दुनिया को आकर्षित करता है।

आइये जानते है दिल्ली के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल – Tourist Place In Delhi in Hindi

दिल्ली में न जाने कितने खूबसूरत आकर्षित स्थल है। जो दिल्ली में आने वाले हर व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करते है। आइये जानते है देश की राजधानी दिल्ली कुछ प्रमुख दार्शनिक स्थल ओर उनके बारे में सम्पूर्ण जानकारी।

इंडिया गेट – India Gate

इंडिया गेट

India Gate इंडिया गेट अपनी बेहतरीन कलाकारी के लिए पूरी दुनिया में प्रशिद्ध है। ओर दिल्ली की विश्व पटल पर मेजबानी करता है।

इंडिया गेट का इतिहास – History Of India Gate Hindi

India Gate (इंडिया गेट) दिल्ली के राजपथ पर स्तिथ है। इसे प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1919 में, अफगानिस्तान युद्ध के दौरान मारे गए 90,000 सैनिकों की याद में बनवाया गया था।  

यहाँ शहीदों के नाम हमेशा जवान ज्योति जलती रहती है। जवान ज्योति की शुरुवात 1971 में भारत पाकिस्तान के युद्ध में सहीद हुए भारतीय जवानों की याद में जलाई गई थी। जो अब तक निरंतर जल रही है।

टूरिस्ट के लिए कैसी जगह है।

आज के समय में इंडिया गेट का नाम भारत के प्रमुख दार्शनिक स्थालों में से एक है। इसकी ऊंचाई 160 फ़ीट है। यहां के आस पास टूरिस्ट के लिए खाने की चीज़ें बहूत मिलती है।

समय 24 घंटे खुला रहता है।
फीसकोई फीस नहीं फ्री है।
पता:-राजपथ मार्ग ,इंडिया गेट ,नई दिल्ली, दिल्ली 110001.

जंतर-मंतर – Jantar Mantar

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जंतर- मंतर का निर्माण 1724 में राजा जय सिंह ने करवाया था। जो विज्ञानिकी विकास को बढ़ावा देने के लिए अक्षर जाने जाते थे।

जंतर- मंतर का इतिहास – History Of Jantar Mantar Hindi

महुम्मद शाह के शासन के दौरान, सुल्तान के शिकार पर जाने के लिए सही समय और ग्रहों की दिशा को ले कर हिन्दू और मुस्लिम ज्योत्सियों में विवाद हो गया।

इसलिए उनके इसी विवाद को दूर करने के लिए महाराजा जय सिंह ने जंतर-मन्त्र का निर्माण करवाया।

जिससे समय और ग्रहों की दिशा का स्टिक पता लगाया जाता था। इसके आलावा महाराजा जयसिंघ ने जयपुर,उज्जैन, मथुरा, वाराणसी में भी इसके प्रतिरूप बनवाये।

टूरिस्ट के लिए कैसी जगह है।

यह दिल्ली के मुख्य दार्शनिक स्थलों में से एक है। यह का वातावरण बहुत सुंदर और हरा भरा है। इसके आस-पास आपको और मंदिर भी मिले जिनके आप दर्शन कर सकते है।

यहां का नज़ारा खूबसूरत होने के कारण आप अच्छे फोटो भी क्लिक कर सकते है।

समय6 AM से 6 AM
फीस5 रूपये
पता:-संसद मार्ग, कनौघट प्लेस, नई दिल्ली, दिल्ली 110001

लाल किला – Red Fort

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लाल किला

Lal Quila –लाल किला दुनियाँ के प्रमुख किलों में से एक है। इसकी सुंदरता और इस बनावट को देखते हुए UNESCO ने इसे 2007 में विश्व धरोहर घोसित कर दिया। इसको खूबसूरत लाल पथरों से बनाया गया है इसलिए इसे लाल किला कहा जाता है। हर साल 15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री यहाँ झंडा फहराते हैं और देश को सम्बोधित करते हैं।

लाल किला का इतिहास – History Of Lal Quila Hindi

इस किले को सुल्तान शाहजहां ने 1638 में इसका निर्माण शुरू किया था। जो तकरीबन 10 साल के अंदर बनाकर तैयार किया गया। इसके बनने के साथ ही शाहजहां ने अपनी राजधानी दिल्ली स्थान्तरित कर दी थी। इस क़िले की दीवारें लगभग 2 किलोमीटर तक फैली हुई हैं। सोने और चांदी से घिरा इसका छज़्ज़ा इसकी सुंदरता में चार चाँद लगाए हुए है।

टूरिस्ट के लिए क्या-क्या चीज़े मिलती हैं – लाल किले के अंदर एक चटटा बाजार है। जो कभी राजा महराजा के समय बेहतरीन जौहरियों, सुनारों, बुनकरों के लिए फेमस बाजार था। लेकिन अब भी यहां पर्यटकों के लिए आभूषण और कुछ सामान बेचा जाता है। जिसे टूरिस्ट बड़े चाव से खरीदते है।

समय9 AM से 6 PM
फीस10 रूपये
पता:-नेताजी सुभाष मार्ग, लाल क़िला, चांदनी चौक, नई दिल्ली, दिल्ली 110006

अक्षरधाम मंदिर – Akshardham Mandir

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अक्षरधाम मंदिर को को नही जानता। यह अपनी महत्वता के कारण पूरी दुनिया में परषिद है। अगर हम इसकी बनावट की बात करें। तो यह दुनिया का 3 सबसे बड़ा मन्दिर है। जो युमना नदी के किनारे तकरीबन 100 एकड़ में फेला हुआ है।

संगमरमर ओर लाल पत्थरों के बेजोड़ संगम से बना ये मंदिर अपनी खूबसूरती से हर किसी को मोहित कर लेता है। अक्षरधाम में तकरीबन 200 मूर्तियाँ सुसज्जित की गई हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही किसी अलग दुनिया आ अहसास होता है। क्योंकि इसके अंदर की सजावट, मुर्तिया, खूबसूरत फूल, मंदिर की दीवारों पर कलाकारी दर्शकों को मोह लेती है। 

मंदिर के बनने के पीछे की कहानी – Akshardham Mandir History

यह इस आधुनिक काल में अदभुत ओर एक भव्य मंदिर है। अक्षरधाम का अर्थ होता है – जहां भगवान का निवास होता हो। अगर हम इसके निर्माण की बात करें तो इसका निर्माण प्रमुख स्वामी महाराज ने 2005 में करवाया था।

मंदिर में एक खूबसूरत कृत्रिम झील भी बनाई गई है। इसकी खासियत ये है। कि इसमें 151 पवित्र नदियों का पानी मिलाया गया है। यहां आप नाव की सवारी का भी आनंद उठा सकते है। यहां पर जाने पर आपके मन को एक सुकून का एहसास होता है। 

समय9:30 AM से 6:30 PM
फीसकोई फीस नहीं फ्री है।
पता:-नॉएडा मोर, पांडव नगर, नई दिल्ली, दिल्ली 110006

Lotus Mandir – लोटस मंदिर

Lotus Mandir (लोटस मंदिर) दुनिया के सात अजूबों में से एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह अपनी कमलनुमा आकृति के कारण एक अच्छा पर्यटन स्थल भी है। देश विदेश से लोग इसे हज़ारों की संख्या में हे रोज देखने आते हैं। इस मंदिर को 13 नवम्बर 1986 को बनाकर तैयार किया गया था। इसकी सबसे बड़ी बात ये है की इसका नाम मंदिर होते हुए भी इसमें कोई भगवन की मूर्ति नहीं हैं।

लोटस मंदिर का इतिहास – Lotus Mandir History Hindi

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लोटस मंदिर

मंदिर कालकाजी की पहाड़ियों के बीच में स्तिथ है। मंदिर का निर्माण 1986 में हुआ। इसे ईरानी वास्तुकार फरीबोर्ज़ साभा ने डिज़ाइन किया था। उनके इस महँ रचना के लिए उन्हें बहुत प्रसंसा और पुरस्कार भी मिले। और इस रचना को दुनिया की 7 सबसे अद्भुत रचनाओं में शामिल किया गया।

मंदिर का क्षेत्र 25 एकड़ में फैला हुआ है। इसे बनाने के लिए खास कोरियाई मिटटी का प्रयोग किया गया। इस मिटटी को प्रयोग करने के लिए सही तापमान पर ठंडा रखें पड़ता था। इसलिए गर्मी के दिनों में इसमें बर्फ मिले जाती थी। मंदिर के चरों और तालाब बनाये गए। ताकि मंदिर के तापमान को समान्य रखा जा सके।

समय9:30 AM से 6:30 PM
फीसकोई फीस नहीं फ्री है।
पता:-लोटस टेम्पल, बहपुर, शम्भू दयाल बाघ, कालकाजी, नई दिल्ली, दिल्ली 110006

Birla Mandir – बिरला मंदिर

बिरला मंदिर

दिल्ली के मद्य्य में स्तिथ बिरला मंदिर एक बहूत पुराना और प्रशिद्ध मंदिर है। दूर दूर से यहां लोग इस खूबसूरत मंदिर के दर्शन करने के लिए आते है। अपनी खूबसूरत और महान कलाकृतियों के कारण ये एक पर्यटन स्थल भी है।

इसकी दीवारों पर मनमोहक चित्र ओर धर्म ग्रंथों के श्लोक लिखे ओर बनाये गए है। जो एक सुंदर दृश्य के साथ साथ अच्छी प्रेरणा भी देते है। इसके पत्थरों पर की गई कलाकारी के वारणसी से 101 पण्डितों को बुलाया था। ताकि वे इन चित्रों को जीवित रूप दे सकें।

बिरला मंदिर का इतिहास – History Of Birla Mandir Hindi

इसका निर्माण 1938 में देश के धनवान परिवार बिरला परिवार ने करवाया था। इसलिए इसे बिरला मंदिर कहा जाता है। वैसे इस मंदिर का असली नाम लक्ष्मी नारायण मंदिर है। मंदिर का उदघाटन देश के परम् पिता महात्मा गांधी जी ने किया था। मंदिर के अंदर कृत्रिम पहाड़ व झरना भी है।

जो इस मंदिर की खूबसूरती और खूबसूरत बना देता है। हर हिन्दू त्योहार पर यहाँ का नज़ारा देखने लायक  होता है। जैसे जन्माष्ठमी, दिवाली, गणेश चतुर्थी के दिन यहां पर अच्छा रंग मंच दिखाई देते है। यह मंदिर हमारे समाज में जाति प्रथा को दूर करने का एक अच्छा संदेश देता है। इस मंदिर के हर धर्म और जात के लिए दरवाज़े हमेशा खुले रहते है।

समय4:30 AM से 9:00 PM
फीसकोई फीस नहीं फ्री है।
पता:-मंदिर मार्ग, गोले मार्किट के नज़दीक ,नई दिल्ली, दिल्ली 110001

जामा मस्जिद – Jama Masjid

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जामा मस्जिद दुनिया की प्रमुख मस्जिदों में से एक है। यह भारत की सबसे बड़ी मस्जिद है। शुरू में इसे मस्जिद-ए-जहान-नुमा के नाम से जाना जाता था। जिसका मतलब होता है पूरे विश्व को साथ ले कर चलने वाले।

मस्जिद में कलाकारों की कलाकारी देखने लायक है। इसके साथ बने बड़े-बड़े सतंभ लाल पत्थर ओर संगमरमर से बनाये गए है। मस्जिद की दीवारों पर सुंदर  चित्रों के साथ कुरान की कुछ मुख्य बातों का जिक्र किया गया है। यहां पर शाहजहाँ की याद में कुछ चीज़ें भी रखी हुई है। जैसे मृगछाल पर लिखी हुई कुरान , मुहम्मद की दाढ़ी के बाल , उनके संगमरमर के पत्थरों पर पैरों के निशान।

जमा मस्जिद का इतिहास – History Of Jama Masjid Hindi

इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँ ने 1644 से 1658 के बीच किया गया। यहां तकरीबन 25000 हज़ार लोग एक साथ नमाज़ अदा कर सकते है। यह लाल किले से 500 मीटर दूर पड़ती है। लालकिला इसके सामने बना हुआ है। यह संगमरमर ओर लाल पत्थरों से बनी एक बेजोड़ कला है। जिसे लगभग 5000 हजार कारीगरों ने मिल कर बनाया था।

समय7AM से 6:30 PM
फीसकोई फीस नहीं फ्री है।
पता:-मीना बाजार, जामा मस्जिद, चांदनी चौक, नई दिल्ली, दिल्ली 110006


बंगला साहिब गुरुद्वारा – Bangla Sahib Gurudwara

बंगला साहिब गुरुद्वारा

Banghla Sahib Gurudwara – बंगला साहिब दिल्ली का एक बहुचर्चि सिख गुरुद्वारा है। जिसकी हर धर्म के लोग मान्यता रखते है। यहां हर धर्म के लोग गुरुद्वारे के दर्शन करने आते है। यह एक साधरण ओर खूबसूरत गुरुद्वारा है। जिसकी चोटी सोने की परत से ढकी हुई है ओर दूर से ही अपनी ओर आकर्षित करती है।

यहां दिन भर मधुर गुरुबाणी का पाठ होता रहता है। गुरुद्वारे में आने वाले भक्तों के लिए खाने के लिए पूरे दिन लंगर चलता रहता है। जिसे भगत गुरु के प्रशाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इस गुरुद्वारे के दर्शन करने लोग देश – विदेश से दूर दूर से आते हैं।

गुरद्वारे के परिसर में एक हाई स्कूल, संग्रहालय, पुस्तकालय ओर एक अस्पताल भी है। जो गुरुद्वारे की देख रेख में चलते है। गुरुद्वारे के अंदर एक सरोवर भी है। जिसका निर्माण सन 1783 में सरदार भागल सिंह धालीवाल ने किया था। 

गुरद्वारे में आने वाले भगत इस सरोवर को बहूत शुद्ध मानते है। और कहते है कि इसके पानी से शरीर की बीमारियां दूर होती है। इसलिए लोग गुरुद्वारे में प्रवेश करने से पहले इसमे डुबकी लगाते है।

बंगला साहिब गुरद्वारा का इतिहास – History of Bangla Sahib Gurudwara Hindi

इस जगह पर जहां यह गुरुद्वारा है पहले यहां जयपुर के राजा जय सिंह का महल था। लेकिन जब सिखों के आठवें गुरु राजा जय सिंह के यहां मेहमान के तौर पर रुके हुये थेे। तो गुरु हरिकिशन जी ने उस समय फैले हुई भयंकर बीमारी चेचक ओर हैजा को इस बंगले के कुएं से शुद्ध पानी दे कर लोगो की जान बचाई।

कुछ टाइम बाद वे भी बीमारी के चलते स्वर्ग सिधार गए। इसी कारण लोगों की इसमे आस्था बढ़ गयी । राजा जय सिंह ने यह बंगला, बंगले से गुरुद्वारे में तब्दील कर दिया।

समय24 घंटे खुला रहता है।
फीसकोई फीस नहीं फ्री है।
पता:-हनुमान रोड, कनौघट प्लेस, नई दिल्ली, दिल्ली 110001

क़ुतब मीनार – qutub minar

क़ुतब मीनार

क़ुतब मीनार भी दिल्ली का एक खूबसूरत दार्शनिक सथल है। इसका निर्माण भारत आने वाले पहले मुस्लिम शासक कुतुबुदीन ने 1199 ई में किया था। इसे इस्लाम को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था।

अगर हम इसके बनावट की बात करें तो इसे शुरवाती ३ मज़िल लाल पत्थर से बनवाई गयी है और बाकी की दो मज़िल संगमरमर और लाल पत्थर से बनवाई गयी हैं। क़ुतुब मीनार का आधार का व्यास 14३ मीटर है। जो लम्बाई बढ़ने के साथ साथ इसका व्यास घटता रहता है। इसका ऊपरी शिरा २।७ मीटर है।

यहां का वातावरण बहुत सूंदर देश-विदेश से लोग इस अद्भुत रचना को देखने आते है। इसके चरों और हरा भरा पार्क है जो इसके सुंदरता को और बढ़ा देता है। अगर हम्म इसके बनाने की बात करें तो इसके पीछे भी एक लम्बी कहानी है। आइये इसके इतिहास के बारे में जानते हैं।

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क़ुतुब मीनार का इतिहास – History of Qutub Minar in Hindi

क़ुतुब मीनार का निर्माण कुतुबुदीन ऐबक दिल्ली को जितने के बाद एक विजय सतम्भ के रुप्प में इसका निर्माण ११९३ ई में शुरू किया। लेकिन वे अपने समय में इसको पूरा न क्र सके और इसका आदर ही बनवा सके।

अब इसके निर्माण की जिम्मेवारी कुतुबुदीन के उत्तराधिकारी इल्तुतमिश पर आ गयी वे भी इसका निर्माण पूरा न क्र सके और इसकी केवल तीन मंजिल ही बनवा पाए। और ऐसे पूरा करने की जिम्मेवारी इल्तुतमिश के उत्तराधिकारी फिरोज शाह पर चली गयी। फिरोज शाह ने इसकी आखरी दो मंजिलो का निर्माण किया और इससे सम्पूर्ण किया।

समय7 AM से 5 PM
फीस30 रूपए
पता:-मेहरौली, नई दिल्ली, दिल्ली 110001

हुमायूँ का मकबरा – Humayun Tomb

हुमायूँ का मकबरा

Humanyu Maqbara – हुमायूँ का मकबरा दुनिया में बहुत चर्चित है। UNSCO ने इससे विश्व धरोहर घोसित किया हुआ है। यह मकबरा हमउ की बेगम हीमदा बानो बेगम ने १५६९ – ७० के बीच करवाया था। यह लाल पथरों और काले संगमरमर से बनी एक खूबसूरत कला है।

जिससे हर कोई इसकी और आकर्षित होते है। इसको बनाने में 8 वर्ष का समय लगा था। इसमें हुमायूँ उनकी बेगम और कुछ अन्य लोगो की कब्रे दफन हैं।

यह भारत का पहला ऐसा भवन है जिसे पर्शियन अंदाज़ में बनाया गया है। इसकी रचना से प्रेरित हो कर मुगलों ने और मकबरों का निर्माण किया जैसे ताज महल और बहुत सारे मकबरे है जिनका डिज़ाइन हुमायूँ के मकबरे से मिलता जुलता है।

मकबरे के आस पास सुंदर हरा भरा मैदान है जिसके मध्य में मकबरा बना हुआ है। मकबरे के अंदर 8 भुजाओं वाले कमरे बने है इनके बीच में मुग़ल सम्राट हुमायूँ की कबर है। जो एक आकर्षण केंद्र हैं।

मकबरे का इतिहास – History Of Humayun Maqbara in Hindi


Humayun Maqbara मकबरे का इतिहास भी बहुत रोचक है। जब हुमायूँ को सालों के प्रयास के बाद दिल्ली की गद्दी मिली। तो वे उस पर ज्यादा समय तक राज न कर सके। क्योकि एक बार अपने पुस्तकालय के भर्मण के दौरान उनकी सीढ़ियों से गिर कर मृत्यु हो गयी।

उनकी इस अचनाक मृत्यु से उनकी पत्नी बेगम हमीदा बानो को बहुत दुःख हुआ। और उन्होंने उनकी याद में मकबरा – ऐ – हुमायूँ बनाने की घोषणा की। तकरीबन ८ साल में इसको पूरा किया गया। इस मकबरे का डिज़ाइन उजेबीकस्तान के महँ वास्तुकार मिराक मिर्ज़ा घियास ने किया था।

समय6 AM से 6 PM
फीस30 रूपए
पता:-मथुरा रोड अपोजिट दरगाह, निजामुद्दीन, नई दिल्ली, दिल्ली 110013

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